मंगलवार, 4 नवम्बर 2008

आप बोलेंगे हिन्‍दी में और कम्‍प्‍यूटर टाइप करेगा

आप बोलेंगे हिन्‍दी में और कम्‍प्‍यूटर टाइप करेगा
जी हां, अब बाजार में एक ऐसा औजार आ गया है कि आप बोलेंगे हिन्दी में और कम्‍प्‍यूटर टाइप करेगा. आपसे बोलने में गलती होगी तो उसे दोबारा बोलने पर ठीक भी कर देगा. इतना ही नहीं, आपके प्री रिकार्डेड संदेश, भाषण या बोले गये टैक्‍स्‍ट को भी उसी बहादुरी के साथ टाइप करके आपको थमा देगा. ये पैकेज आपके लिए एडिटिंग करेगा, अलाइनमेंट करेगा, आउटपुट में मूल डॉक्यूमेंट का फार्मेट बनाये रखेगा शब्‍द जोड़ने, हटाने देगा, अपडेट करने देगा, और आपको शब्देकोश की सुविधा के अलावा पर्यायवाची शब्द भी देगा.
है ना मजेदार ख्याल कि आप चांदनी रात में अपनी बाल्‍कनी में अकेले बैठे बीयर के घूंट ले रहे हैं और हैड फोन लगाये अपनी कहानी, ग़ज़ल, उपन्यास या कुछ भी अपने पीसी को डिक्टेशन दे रहे हैं. एक नज़ारा और भी हो सकता है कि जो कुछ कहना है हमें हैड फोन लगा कर पीसी के सामने कह दें. एडि‍टिंग बाद में होती रहेगी.
और भी कई नज़ारे हो सकते हैं, सारे प्रेम वार्तालाप, मंत्री जी के भाषण, संतों की वाणी, बीवी या हस्‍बैंड के गुस्से भरे अलफाज़ जस के तस बोलते हुए टाइप होते चलें. न मुकरने की आशंका न भूलने का डर. कितना अच्छा कि हिन्दी टाइप करने के लिए लिखना पढ़़ना आना जरूरी नहीं. कोई भी अपने पीसी से ये काम ले सकता है. सेक्रेटरी नहीं आयी तो परवाह नहीं, वाचांतर पैकेज है ना....
ये वाचांतर पैकेज आपके लिए कई बरस की रिसर्च के बाद ले कर आये हैं पुणे की सीडैक के वैज्ञानिक. कीमत पूरे सेट की सिर्फ 5900 रुपये. मंगाने या ज्यादा जानकारी के लिए देखें www.cdac.in या सम्पर्क करें अजय जी से ajai@cdac.in पर या उनसे फोन 9371034560 पर बात करें
सूरज प्रकाश

11 टिप्पणियाँ:

Raviratlami 4 नवम्बर 2008 1:24 am  

क्या किसी ने वाचांतर का प्रयोग किया है? यदि हाँ तो उसकी एक्सूरेसी कितनी है? क्या वह दक्षिणभाषी या गुजराती टोन लिए हिन्दी को भी उसी दक्षता से टाइप कर सकता है या फिर सिर्फ उत्तर भारत भाषी? क्या उसे ट्रेन करने के पश्चात् उसकी दक्षता में पर्याप्त वृद्धि होती है कि हम सामग्री का वाकई उपयोग कर सकें? यदि हाँ, तो इस उत्पाद को तो हम हाथों हाथ लेना चाहेंगे. इसका डेमो वर्जन भी कहीं है?

दीपक कुमार भानरे 4 नवम्बर 2008 1:29 am  

महोदय , बहुत अच्छी जानकारी दी है .
सीडेक की यह उपलब्धि इलेक्ट्रॉनिक सूचना के युग मैं हिन्दी भाषा की सम्रद्धि और सशक्त अभिव्यक्ति मैं एक और नए आयाम को जोडेगा .

SHUAIB 4 नवम्बर 2008 1:43 am  

आप तो जैसे मार्केटिंग कर रहे हैं।
भाई, ऐसा कोई टूल बताओ जो इंटरनेट पर मुफ़्त हो।
खैर, ये जानकारी देने के लिए आपका बहुत शुक्रिया। कीमत ज्यादा नहीं खरीदा जासकता है ये सॉफ़्टवेयर।

अनुनाद सिंह 4 नवम्बर 2008 2:56 am  

यदि वाचान्तर की शुद्धता ९०% तक भी है तो हिन्दी के लिये सी-डैक की यह एक क्रान्तिकारी उपलब्धि है. सी-डैक और आप, दोनो को साधुवाद!

संजय बेंगाणी 4 नवम्बर 2008 4:27 am  

चीज उपयोगी है, मगर शौकिया लोगों के लिए महंगा भी है.

सुखद सुचना.

masijeevi 4 नवम्बर 2008 4:34 am  

रविजी की तरह हम भी इस औजार की तकनीकी समीक्षा पढ़ने के लिए आतुर हैं। खासतौर पर ये कि क्‍या ख्‍ह इस्‍तेमाल के साथ साथ खुद को बेहतर बनाता हे या नहीं।

कथाकार 4 नवम्बर 2008 4:51 am  

एक किस्‍सा यूं है कि भारत में कम्‍प्‍यूटर जितने बिकते हैं उनकी तुलना में साफ्टवेयर दस प्रतिशत भी बिकते क्‍योंकि हम साफ्टवेयर की कापी करने में माहिर हैं. सेंत मेंत में इंतजाम कर लेते हैं.ये देख कर अपने बिल गेटसाहब ने विंडो बिस्‍ता बनाया जो कोई भी पाइरेटैड साफ्टवेयर नहीं लेता. गेट भाई खुश कि अब देखें कैसे नहीं खरीदते पैकेज. लेकिन अपने भाई लोग बिल से भी आगे हैं. बंदों ने विस्‍ता को ही पाइरेट कर दिया और ओपन कर दिया उसे कि जो मर्जी डालो . इसलिए हमें हर साफटवेयर की कीमत ज्‍यादा ही लगती है. यही अंग्रेजी स्‍पीचवाला ड्रैग्‍न 12000 का है.
जहां तक देखने की बात है मैंने इसका डेमो 3 बरस पहले भी कराया था और कई बार देखने के बाद अभी पिछले सप्‍ताह कराया है. किसी ट्रेनिंग की जरूरत नहीं. साफ बोलें तो 70 से 95 प्रतिशत तक समझ लेता है. अब नयी टैक्‍नालाजी है इतना टाइप कर दे तो भी क्‍या कम है. जहां तक काम का है तो सो तो है ही. हां जांचने परखने के लिए तो खुद आगे आना पड़ेगा

खुद संवाद कर के देखें सीडैक से.आखिर सरकारी मामला है

PN Subramanian 4 नवम्बर 2008 5:38 am  

यह तो एक बड़ी उपलब्धि है. बड़ी अच्छी खबर लाए हैं. आभार.

Gyan Dutt Pandey 4 नवम्बर 2008 5:55 am  

अच्छा बताया आपने। ड्रैगन का प्रयोग कर छोड़ दिया था। इस का जुगाड़ कर देखेंगे।

जितेन्द़ भगत 4 नवम्बर 2008 9:20 am  

काफी महत्‍वपूर्ण सूचना प्राप्‍त हुई। ‍दृष्‍टि‍हीन छात्रों के लि‍ए यह जादुई चि‍राग से कम नहीं होगा।‍

bahadur patel 19 नवम्बर 2008 10:39 am  

kaphi achchha hai. maza ayega.

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